बिहार चुनाव को लेकर सुरक्षा बलों के द्वारा नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन जंगल  '

नक्सली हमले की आशंका के कारण सुरक्षाबलोें का ऑपरेशन ‘जंगल’

गया:

बिहार में पहले चरण के चुनाव में नक्सली हमले की आशंका बढ़ी है. इस खतरे को देखते हुए पैरामिलिट्री फोर्सेस ने ऑपरेशन जंगल चलाया है. बिहार के चार नक्सल प्रभावित जिलों में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जा रहा है. प्रशासन ने नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान का समय भी घटाकर सुबह 7 बजे से 4 बजे कर दिया है. सुरक्षाबल को  गया जिले का नक्सल कमांडर की तलाश है. गया से करीब 50 किलोमीटर दूर पकरी गुईया में प्रशासन से लेकर पैरामिलिट्री फोर्स इस वक्त हाई अलर्ट पर रखा गया है.

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पिछले लोकसभा चुनाव में इसी इलाके में नक्सलियों के दो हमले हुए हुए जिसमें एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई थी. चकरबंधा जंगल गया, औरंगाबाद और झारखंड के पलामू जिले तक फैला है इसलिए ये नक्सलियों का रेड कॉरिडोर माना जाता है. यहां का सबसे कुख्यात नक्सल कमांडर संदीप ने लोगों से मतदान बहिष्कार की धमकी दे रखी है. इसी के चलते ये रात के अंधेरे में लैंड माइन्स बिछाकर पैरामिलिट्री फोर्स पर हमला करने की फिराक में है. इससे मुकाबला करने के लिए शाम ढ़लते ही पारामिलिट्री फोर्सेस का नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन जंगल शुरु होता है.

रात के अंधेरे में एक कंपनी चकरबंधा के जंगलों में डॉग स्कवाड और एंटी माइन डिटेक्टिव टीम के साथ निकलती है. दूसरी टीम जंगल से गुजरने वाली सड़क पर बाइक से लगातार गश्त कर रही है और रात को गाड़ियों की तलाशी ले रही है.CRPF कमांडेट सोहन सिंह ने कहा कि हम सड़क और जंगल में लगातार कॉबिंग करते है तो ये फिलहाल कुछ कर नहीं पा रहे हैं. लेकिन इनके ओवर ग्राउंड वर्कर काफी है इसलिए ये छोटी घटनाएं करने में कभी कभार कामयाब हो जाते हैं.

नक्सल प्रभावित इस इलाके में आने वाले दिनों में ढ़ाई सौ कंपनियों की तैनाती होगी…प्रशासन ने मतदान का वक्त भी कम करके सुबह 7 बजे से 4 बजे तक कर दिया है ताकि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से करवाया जा सके. लेकिन इस इलाके में सुरक्षा बल से लेकर ग्रामीणों के बीच मेें रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक चुनौतियों का सिलसिला लगातार बना रहता है.



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