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बिहार: गया में जेपी नड्डा की चुनावी सभा में सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर उड़ी धज्जियां

2020 Bihar Assembly Election: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गया में चुनावी जनसभा को संबोधित किया.

गया:

Bihar Election 2020: कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण काल में बीजेपी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) की बिहार के गया (Gaya) में पहली रैली हुई. हालांकि होर्डिंग में दो मीटर की सामाजिक दूरी और मास्क को अनिवार्य बताया गया था लेकिन तीन हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ में सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं. तमाम लोग बिना मास्क के थे और इनके मास्क न लगाने के कुछ अजीबो गरीब तर्क थे. रैली में जेपी नड्डा ने कहा कि ”जहां भगवान राम आए थे,‌ जिस फल्गु नदी के तट पर आए थे, उससे पवित्र जगह और क्या होगी. लोकनायक जयप्रकाश नारायण को आज याद करने का समय है. मुझे 11 अक्टूबर को उनका जन्मदिन याद है. आज मैं उनके स्थान‌ पर गया और मुझे अतीत का उनका आंदोलन याद आ गया. मुझे यह भी याद आया कि नानाजी देशमुख ने जयप्रकाश नारायण को अपना गुरु मान लिया था क्योंकि उनका जन्मदिन भी उसी दिन पड़ता है. नानाजी देशमुख के कामकाज से हमें बिहार से प्रेरणा मिलती है.”

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नड्डा ने कहा कि जिस ”जेपी ने आंदोलन किया था कांग्रेस के खिलाफ, उसी कांग्रेस के साथ कुछ पार्टियां आज खड़ी हैं. हमें जेपी के संपूर्ण क्रांति आंदोलन को याद करना‌ है. मोदी जी ने भारत के किसानों को आजाद कर दिया है‌. अब किसानों को पटवारी का चक्कर नहीं लगाना होगा. 6,32,000 गांवों में डिजिटल तरीके से जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज का काम मोदी जी ने शुरू किया है.” 

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि ”देश मोदी जी के नेतृत्व में नई कल्पना के साथ आगे बढ़ रहा है. पहले जाति और मजहब के आधार पर कांग्रेस पार्टी राजनीति करती थी लेकिन मोदी जी ने वह संस्कृति बदल दी और कहा कि हम अपने काम को लेकर जनता के बीच जाएंगे. शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतों पर करोड़ों रुपये केंद्र सरकार ने खर्च किए हैं.”

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नड्डा ने कहा कि ”कांग्रेस के नेता जन-धन योजना‌ का मजाक बनाते थे, लेकिन उसी योजना के तहत खोले गए खाते में लाभार्थियों को बिना डाकिये या किसी अतिरिक्त देरी के आर्थिक मदद दी गई. दिव्यांग मजदूर को  1000 की राशि पहुंचाई गई. वहीं दूसरी तरफ किसान सम्मान निधि के तहत आठ करोड़ बासठ लाख लाभार्थियों तक 2000 रुपये पहुंचाए गए. इसके अलावे 20 करोड़ गरीबों को 15 सौ रुपये जन-धन खाते के माध्यम से पहुंचाए गए.”

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